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shaktisingh


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पोंटिंग से सबक लें सचिन

Posted On: 21 Feb, 2012  
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स्पोर्ट्स मेल में

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बीसीसीआई बनी बनिये की दुकान

Posted On: 16 Jan, 2012  
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स्पोर्ट्स मेल में

6 Comments

बूढ़ी हो गई भारतीय तिकड़ी

Posted On: 6 Jan, 2012  
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स्पोर्ट्स मेल में

11 Comments

खेल पस्त खिलाड़ी मस्त

Posted On: 7 Oct, 2011  
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स्पोर्ट्स मेल में

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2जी बना एक खतरनाक ड्रैगेन

Posted On: 30 Sep, 2011  
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पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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अरे भइया यह कैसी टोपी है!

Posted On: 23 Sep, 2011  
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पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

रुद्र जी, लगता है आपने पूरा ब्लॉग नहीं पढ़ा, पहली बात-राजीव गाँधी और इंद्रा गाँधी को भारत रत्न देने की घटना पुरी की पुरी राजनीति से प्रभावित है यहां पर देने वाला और लेने वाला एक ही व्यक्ति है. दूसरी बात- आपने सत्यजीत राय के बारे में लिखा है. सत्यजीत राय उच्च कोटी के निर्देशक थे उन्होंने भारतीय फिल्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर पहचान दिलाई. उन्होंने अपनी फिल्म को बनाने के कला को माध्यम बनाया समाज को जागरूक किया व्यवसायिक या फिर पैसा कमाना उनके फिल्म का उद्देश्य नहीं होता था. वह सारा जीवन तंगहाली में रहकर कला पर आधारित फिल्म बनाते रहे वह चाहते तो वह अपनी फिल्म को व्यवसायिक रूप दे सकते थे. तीसरी बात- जे आर डी टाटा की बात कही आपने, जे आर डी टाटा उस दौर के व्यक्ति है जिस समय देश में भारी उद्योग की कमी थी. रोजगारों का नामो-निशान नहीं था. टाटा ने देश में उद्योग स्थापित करके और भारी संख्या में लोगों को रोजगार देकर देश को पटरी पर लाने की कोशिश की. सरकार उस सक्षम नहीं थी कि वह किसानों सहायता कर सके टाटा ने उनकी हर तरह से सहायता की. सचिन अभी पूर्ण रुप से व्यवसायिक अंदाज में खेल रहे हैं. क्या वह बिना आईपीएल और विज्ञापन के अपना घर नहीं चला सकते थे. अगर वह आईपीएल नहीं खेलेंगे तो वह भूखे मर जाएंगे. अगर अभी कुछ सालों में किन्ही कारणों से सचिन को भारत रत्न दे भी दिया जाता है तो वह राजनीतिक ही होगा.

के द्वारा: shaktisingh

शक्तिसिंह जी नमस्कार, बहुत सी बातें हैं जो सचिन को भारत रत्न के खिलाफ जाती हैं किन्तु हम सिर्फ उनकी संपत्ति या आई पी एल के आधार पर कहने की उनको भारत रत्न नहीं मिलना चाहिए तो शायद गलत होगा. आज किसी भी खेल के मशहूर होते ही उसके श्रेष्ठ खिलाड़ी को विज्ञापन मिलाने लगते हैं. इसलिए विज्ञापन के आधार पर भी किसी को अयोग्य घोषित नहीं किया जा सकता.विज्ञापन के ही सहारे कई अन्य खिलाड़ी आगे बढ़ पा रहे हैं.खैर अभी तो बहुत सी महान हस्तियाँ और हैं जिन्हें अवश्य ही भारत रत्न मिलना चाहिए.फिलहाल हम मेजर को मिलने जा रहे भारत रत्न के लिए ख़ुशी जाहिर करें क्योंकि इसमें भी नियमो की आड़ में काफी वक्त लग गया. अवश्य विचार करने योग्य आलेख.

के द्वारा: akraktale

के द्वारा: sinsera

भाई शक्तिसिंह जी, नमस्कार पहली बार आपका आलेख पढ़ा अच्छा लिखा किन्तु मैं, आपकी इस बात से बिलकुल सहमती नहीं रखता खासकर इस तिकड़ी के बारे मैं जिसका आपने जिक्र किया है, यदि आप सही से आंकड़े खंगालेंगे तो हमेशा ही इस तिकड़ी का प्रदर्शन ऑस्ट्रेलिया मैं लाजवाव रहा है ! खासकर सचिन और लक्ष्मण का इस बार जरुर द्रविड़ और लक्ष्मण अभी तक कुछ खास नहीं कर सके किन्तु सचिन वर्तमान सीरिज मैं भी रन बना रहे हैं, समस्या इस तिकड़ी की नहीं है समस्या है युवाओं की यदि ये तिकड़ी रन नहीं बना रही है तो आपके युवा गौतम गंभीर , विराट कोहली और खुद कप्तान धोनी क्या कर रहे हैं ? इस तिकड़ी का टेस्ट क्रिकेट मैं जो योगदान भारतीय क्रिकेट मैं रहा है वह अतुलनीय है, जरा सी असफलता से इन पर आरोप लगाना मेरी नजर मैं सही नहीं है ! धन्यबाद !

के द्वारा: allrounder

शक्ति जी सप्रेम नमस्कार आपने सही कहा अगर कांग्रेस चाहती तो लोकपाल को कानून बनाकर जनता के सामने एक भ्रष्टाचार से लड़ने वाली एक शसक्त पार्टी के रूप में अपनी छवि प्रदर्शित कर सकती थी लेकिन कांग्रेस को तोड़ने वाले खुद उनकी पार्टी के लोग ही है | कभी दिग्विजय सिंह के उलटे सीधे बयान आते है तो कभी मनीष तिवारी के | कांग्रेस ने लोकपाल को विरोधी पार्टी की तरह ले लिया है जिसका उसे हर हाल में विरोध करना है | टीम अन्ना ने के विरोध से कांग्रेस की चुनाव में दुर्दशा तो जरुर होगी लेकिन अन्ना का जन समर्थन भी कम होगा | क्योकि भारत का मुस्लिम वर्ग भाजपा में जा नहीं सकता है उसके पास एक ही विकल्प होता है कांग्रेस | और अन्ना का कांग्रेस विरोध मुस्लिम समाज को टीम अन्ना से दूर ले जायेगा |

के द्वारा: Lahar

शक्तिसिंहभाई नमस्कार टोपी पेहनाने के लिये छाती चाहिए । बापू और अन्ना दोनोने छाती टोक के टोपी पेहनाई थी । बापू ने तो ऐसी पेहनाई थी की वो हमारा रोजमर्रा का पोशाक बन गया था । हमे नही मालुम था वो गांधी-टोपी थी, हम तो उसे खादी की टोपी केहते थे और रोज पेहनते थे । वो तो देवानंद, रजेश खन्ना, डेनी और अमिताभ बच्चन ने उतरवा दी वरना आज भी पेहनते । अन्ना की टोपी को तो आप जान ते है दो दिनमे उतर गई । नेता को तो छाती ही नही होती वो क्या ठोक के पेहनाएगा । कोशीश जरूर करता है अपने झुठे वादों की टोपी पेहनाने का । लेकिन जनता अब होसियार हो गई है, पेहले जैसी बेवकुफ नही जो कोई भी ऐरे गैरे की टोपी पेहन ले । अब टोपी पेहनाना आसान नही है, साहब । ये मन्त्र जरूर मोदी ने मुज से सीखा है । मोदीने बता दिया की वो तुष्टिकरण की टोपी नही पेहनता नही पेहनाता । हिन्दु की पगडी पेहनी वो मेरा निजी मामला है क्यों की मै राज नेता से पेहले हिन्दु हुं । धर्म की टोपी अपने ही लोगों की निजी टोपी है उसे दूसरों को नही पेहनानी चाहिये । यदि आप ईसे हिन्दु का तुष्टिकरण समजते हो तो वो आपकी मुर्खामी है और मेरे पास मुर्खों से बात करने का समय नही है ।

के द्वारा: bharodiya

के द्वारा: kfrefqz

के द्वारा: Lizabeth




shakti

  • Achieved rank 2 #140army http://140army.com 909 days ago August 28, 2009
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