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कानून बनते-बनते कहीं लोकपाल का दम न निकल जाए

Posted On: 24 Jun, 2011 पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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देश में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए लोकपाल विधेयक लाने की कवायद चल रही है. भ्रष्टाचार को रोकने के लिए लोकपाल की लड़ाई कई वर्षों से चलती आ रही है. अन्ना हजारे की अगुवाई वाली आज की लोकपाल की लड़ाई अब तक की सबसे बेहतर स्थिति में है. लेकिन सरकार की नीयत को देखते हुए ऐसा नहीं लगता कि यह लोकपाल विधेयक अपना सही स्वरुप प्राप्त कर पाएगा. 5 अप्रैल 2011 को जंतर-मंतर पर अन्ना हजारे के नेतृत्व में लोकपाल विधेयक को लेकर अनशन किया गया. बहुत बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया. जंतर-मंतर पर जन सैलाब उमड़ पडा था. इस आंदोलन से लोकपाल विधेयक के लिए सही दिशा तैयार हो रही थी. लोकपाल का ढांचा तैयार करने के लिए सरकार ने अन्ना एंड पार्टी की सभी मांगो को मान लिया था. अन्ना ने 9 अप्रैल को अनसन समाप्त कर दिया. तब सब कुछ सही चल रहा था. अनसन समाप्त होने के दो दिन बाद सरकार ने अपना सही चेहरा दिखाना शुरु कर दिया. सरकार ने अन्ना और उनके सहयोगियों के पिछे जासुस लगा दिया ताकि उनके पिछले कामों का हिसाब लिया जा सके. सरकार इसमें कुछ हद तक कामयाबी भी की. वकील शशी भूषण को सीडी मामले में फसाया भी गया, इस बीच लोकपाल बिल का मसौदा तैयार करने के लिए बैठके चल रही थी. कुछ जरुरी मसलों पर सरकार और सिविल सोसाइटी के बीच मतभेद दिखाई दे रहे थे.


lokpalफिर आया 4 जून का दिन, योग गुरु बाबा राम के नेतृत्व में कालेधन को विदेशों से वापस लाने के लिए पूरे देश में अभियान चलाया गया. 4 जून को रामलीला मैदान पर अच्छी खासी भीड जुट गई थी. अधिक से अधिक लोग इस अभियान से जुड़ने लगे. उधर सरकार ने सारा ध्यान लोकपाल विधेयक से हटाकर बाबा रामदेव के आंदोलन को पूरी तरह से समाप्त करने में लगा दिया. देखते ही देखते सरकार ने शनीवार 4 जून को अपना सबसे बड़ा खलनायक रुप दिखाकर बर्बरतापूर्वक इस आंदोलन को समाप्त कर दिया. अन्ना और उनके सहयोगियों को सरकार का निर्मम व्यवहार पसंद नहीं आया  इसलिए अन्ना हजारे ने 8 जून को लोकपाल मसौदा समिति की बैठक में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया और राजघाट पर अपने समर्थकों के साथ एक दिन का अनशन किया. अन्ना का यह अनशन सरकार के गले नहीं उतरा तब सरकार ने मन बना लिया कि वह सिविल सोसाइटी की किसी भी बात को नहीं मानेगी. आगे क्या था 20 जून का दिन आया सरकार और सिविल सोसाइटी के बैठक हुई. कुछ मुद्दों पर सहमति हुई लेकिन कुछ अहम मुद्दों पर असहमति भी हुई, जैसे प्रधानमंत्री पद, उच्च न्यायपालिका और संसद के अंदर सांसदों के आचरण जैसे मुद्दे, जिसे सरकार लोकपाल के दायरे में नहीं लाना चाहती है.

सवाल यह उठता है कि जब से लोकपाल की चर्चा हुई तब से अब तब जनता को क्या मिला है या फिर आने वाले समय जनता को क्या मिलने वाला है. अभी तो सरकार ने सिविल सोसाइटी की प्रमुख मांगो को अस्वीकर कर दिया है. जब मानसून अधिवेशन आएगा तो लोकपाल बिल में कितना काट-छाट किया जाएगा इस पर कुछ नहीं कह सकते.


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20 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Lahar के द्वारा
September 2, 2011

क्या कहे शक्ति जी , हमे लगता है कांग्रेस के जो हालत जेपी आन्दोलन के बाद हुआ था कही उसकी पुनरावृति न हो जाये | कांग्रेस ने अपने पैर पे खुद कुल्हाड़ी मारी है

    shaktisingh के द्वारा
    September 3, 2011

    प्रतिक्रिया के लिए आपको बहुत- बहुत बधाई

Santosh Kumar के द्वारा
August 9, 2011

प्रिय शक्ति सिंह जी ,.यह सरकार अब पूरी तरह से बेरहम हो गयी लगती है,..लेकिन नियति को कौन टाल सकता है …..जितना अत्याचार करेंगे ,..उसका हिसाब कहीं ना कहीं तो देना होगा ,..सादर आभार http://santo1979.jagranjunction.com/2011/08/06/%E0%A4%AE%E0%A5%88%E0%A4%82-%E0%A4%AD%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A4%BE%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%88-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A4%BE/

    shaktisingh के द्वारा
    August 10, 2011

    संतोष जी, प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद

rajesh के द्वारा
July 30, 2011

भ्रष्टाचार रोकने की इक्षा-शक्ति के भ्रष्टाचार नहीं रुक सकता. लोक-पाल से लोगों की उमीद बढ़ी है. देखिये आगे क्या होता है. राजेश

    shaktisingh के द्वारा
    August 9, 2011

    बिलकुल राजेश जी,   प्रयास और उम्मीद का दामन हमें नहीं छोड़ना चाहिए.

शिवेंद्र मोहन सिंह के द्वारा
July 19, 2011

ये सरकार अब बेरहम और वहशी हो गई है, अब ये “जन लोक पाल” तो नहीं ही बनाएगी बल्कि “जोकपाल”, ही बनाएगी, क्यूंकि इन चोरों की सरकार जोक पाल से ही बच सकती है नहीं तो सभी के सभी तिहाड़ में कैद होंगे. बहुत सुंदर लेख के लिए साधुवाद …. सादर

    shaktisingh के द्वारा
    August 10, 2011

    शिवेन्द्र जी, विचार प्रकट करने के लिए ध्नन्यवाद

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
July 13, 2011

शक्ति जी सार्थक लेख लोकपाल का दम तो नहीं निकलेगा लेकिन जो भ्रष्टाचार में लिप्त जन समुदाय है नेता हैं मंत्री हैं या उनके समर्थक हैं खासमखास है क्या वे अपने पैर पर सामने से कुल्हाड़ी मारना चाहेंगे कतई नहीं पीछे से उनकी -उनके आगे की पीढ़ी के पीठ में चाहे छुरा ही घोंपा जा रहा है कौन विचार करता है इस पर – उनकी हर संभव कोशिश होगी चेहरा दिखा बिल का लटका दिया जाये … धन्यवाद आप का

    shaktisingh के द्वारा
    July 13, 2011

    सुरेन्द्र जी, प्रतिक्रिया लिए धन्यवाद 

vasudev tripathi के द्वारा
July 5, 2011

सटीक विचार आपके शक्ति जी.

    shaktisingh के द्वारा
    July 6, 2011

    धन्यवाद ,वासुदेव जी 

surendr shukl bhramar5 के द्वारा
July 1, 2011

हार्दिक आभार और धन्यवाद आप का आइये सब मिल हिंदी और साहित्य को अपने सीने से लगा इस समाज के लिए -जमीनी सच्चाई में उतर कुछ करें -शुभ कामनाएं शुक्ल भ्रमर ५

    shaktisingh के द्वारा
    July 2, 2011

    शुक्ल  जी बहुत -बहुत धन्यवाद हिन्दी साहित्य से प्रेम देख कर बेहद ही सुन्दर लगा, आपके इस पहल को मै सलाम करता हु,

Anuj Kumar Karonsia के द्वारा
July 1, 2011

बहुत ही सुन्दर लिखा है आपने, आपने जो मुद्दे उठाया है वह काफी यथार्थपरक है. Anuj Kumar Karonsia के द्वारा July 1, 2011शक्ति जी मैंने अपने लेख मैं दोनों पहलुओं पर इमानदारी से अपनी राय व्यक्त करने का प्रयास किया है. क्योंकि दूसरा पहलूं जानते सब है लेकिन उनके बारे मैं बेबाकी से लिखने बोलने की जल्दी से कोए हिम्मत नहीं जुटा पाता. क्योंकि एसा करने से वो किसी एक तबके को नाराज करते है. इसीलिए प्रजातान्त्रिक व्यवस्था का चौथा स्तंभ लगातार किसी का दास बनता जा रहा है. आपकी महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद!

    shaktisingh के द्वारा
    July 2, 2011

    प्रतिक्रिया लिए बहुत ही धन्यवाद

rahulpriyadarshi के द्वारा
June 25, 2011

लोकपाल का प्रारूप बदलकर इस बार जनता को भरमाया नहीं जा सकता…यह समय की मांग है,लगातार भ्रष्टाचार की मार झेलता आम आदमी अब उठ खड़ा हुआ है,लेकिन भय यही है की अगर फिर से नपुंसकता छा गयी तब तो फिर सरकार ही ‘राज’ करेगी.और आम आदमी पहले की तरह पिसता रहेगा.

    shaktisingh के द्वारा
    July 2, 2011

    हमे अन्ना के जनहित इरादे को सलाम करना चाहिए तथा सरकार के हर गतिविधियों पर नजर रखनी चाहिए

newrajkamal के द्वारा
June 24, 2011

आप ही की तरह से हरेक त्रस्त + देशभक्त और ईमानदार भारतीय को भी इस बिल से जहाँ पर अनेक आशाये है वही पर मन में अनेक शंकाए भी है …. फिर भी उम्मीद पर दुनिया कायम है , वी इस मामले में उम्मीद कुछ कम ही है ….. धन्यवाद

    shaktisingh के द्वारा
    June 25, 2011

    हम और आप आने वाले दिन का इंतजार कर सकते है.


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