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जनता को आखिरकार मिल ही गया अपना “ठेंगा”

Posted On: 21 Dec, 2011 पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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Anna hazare-देश में तमाम तरह के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन हुए. जनता सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरी. जगह-जगह धरना दिए जा रहे थे. सांसदों के घर का घेराव किया जा रहा था. कभी अनिश्चित काल के लिए तो कभी एक दिन के लिए अनशन किए जा रहे थे. इसके बाद सरकार का दावा था कि वह सशक्त लोकपाल बिल लेकर आएगी.


-पूरे देश में काला धन का मुद्दा छाया हुआ था. क्या आम हो, क्या खास, हर किसी को अन्ना का लोकपाल बिल चाहिए था. दफ्तर, स्कूल-कॉलेज, पार्कों और बसों में लोकपाल और भ्रष्ट नेताओं को लेकर चर्चाएं हो रही थीं. वर्तमान सरकार की निंदा की जा रही थी. इसके बाद सरकार अपनी वकालत में यह कहती थी कि हम मजबूत और सशक्त लोकपाल बिल लेकर आएंगे.


-लोकपाल पर किए गए आंदोलन ने देश की सीमाओं को भी पार किया. ब्रिटेन, अमरीका में भारतीय सरकार के खिलाफ धरना दिए जा रहे थे. विश्व की प्रसिद्ध पत्रिका में भारतीय लोकपाल और भ्रष्टाचार संबंधी आंदोलन पर लेख लिखे जा रहे थे. अंतरराष्ट्रीय स्तर के नेता द्वारा भारतीय सरकार को नसीहत दी जा रही थी. उसके बाद सरकार का बयान आता था कि हम सशक्त लोकपाल बिल लेकर आएंगे.


-विभिन्न पार्टियों में घमासान देखने को मिला. हर कोई मजबूत लोकपाल बिल लाने के लिए अपनी पार्टी के विचारों से अवगत कराता था. झूठा ही सही सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही थी. जनता को अपने करीब लाने के लिए हर तरह के पैंतरे चलाए जा रहे थे. जनता को दिखाने के लिए सर्वदलीय बैठक भी बुलाए जा रहे थे. साथ ही सरकार की अपनी कैबिनेट बैठक भी बुलाई जा रही थी. उसके बाद सरकार अपने वक्तव्य में कहती थी कि हम सशक्त लोकपाल बिल लेकर आएंगे.


-मीडिया में लोकपाल को लेकर चर्चाए भी हो रही थीं. इन चर्चाओं में तरह-तरह के हस्तियों ने भी भाग लिया. चर्चाए लंबी होती थीं जिसमें अलग-अलग पार्टी के प्रवक्ता भी मौजूद होते थे. उसमें मौजूदा सरकार के प्रवक्ता भी यह ही कहते थे कि हम सशक्त लोकपाल बिल लेकर आएंगे.


-लोकपाल पर संसद की स्थाई समिति भी बनाई गई. इस समिति ने न स्वीकार किए जाने वाली अपनी रिपोर्ट सरकार के सामने रखी. इस रिपोर्ट के विरोध में जंतर मंतर पर एक दिन का अनशन भी किया गया. विभिन्न पार्टियों के नेताओं को भी बुलाया गया. मंच पर चर्चाएं भी हुईं लेकिन सरकार की तरफ से इस चर्चा में किसी ने भी भाग नहीं लिया. उसके बाद भी सरकार को विश्वास था कि वह सशक्त लोकपाल बिल लेकर आएगी.


-भ्रष्टाचार, लोकपाल और कालेधन पर किए गए हंगामे ने लोकसभा और राज्यसभा ने कई तरह के स्थगन देखे. शीतकालीन सत्र को लोकपाल के लिए डेडलाइन बनाया गया जिसमें सरकार को एक शक्तिशाली बिल को पास करवाना था. संसद पर मीडिया और आम जनता की नजर थी. तब भी सरकार अपने जवाब में कहती थी कि हम सशक्त लोकपाल बिल लेकर आएंगे.


लोकपाल पर तरह-तरह का तोलमोल करने के बाद सरकार ने अपना वादा पूरा किया. मंगलवार को अपना बिल लेकर आ गई. लेकिन यह बिल सरकार के लिए था, आम जनता के लिए नहीं. आम जनता को इस बिल से “ठेंगा” के अलावा कुछ नहीं मिलेगा. सरकार का लोकपाल बिल खाली कागज के डब्बे के समान है जिसमें चारों तरफ गत्ते ही गत्ते नजर आ रहे हैं.




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12 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

mparveen के द्वारा
December 25, 2011

शक्ति सिंह जी नमस्कार, सरकार की नियत तो पहले से ही साफ़ दिखाई दे रही थी रही सही कसर बिल को प्रस्तुत करके पूरी कर दी . बिलकुल ये बिल आम आदमी के लिए नहीं है … बहुत अच्छा आलेख बधाई !!! http://mparveen.jagranjunction.com/2011/12/25/%E0%A4%95%E0%A5%8C%E0%A4%A8-%E0%A4%B9%E0%A5%88%E0%A4%82-%E0%A4%9C%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%86%E0%A4%AA/

    shaktisingh के द्वारा
    December 26, 2011

    प्रवीन जी, राय देने के लिए आपको धन्यवाद

manoranjanthakur के द्वारा
December 24, 2011

समाज को ऐना दिखाती सार्थक रचना बधाई

    shaktisingh के द्वारा
    December 26, 2011

    मनोरंजन जी, प्रतिक्रिया देने के लिए धन्यवाद

gopesh के द्वारा
December 22, 2011

shakti singh ji , vartman kendra sarkaar ke vishay men yahi kaha ja sakta hai -”vinash kaale , viprit budhhih” ab iske papon ka ghada bhar chuka hai! aapne bahut hi achha alekh likha hai ! aapka shat shat abhinandan! कृपया मेरे पहले ब्लॉग को पढ़ें एवं मार्गदर्शन दें! gopesh.jagranjunction.com

    shaktisingh के द्वारा
    December 24, 2011

    गोपेश जी, प्रतिक्रिया देने के लिए आपका धन्यवाद

akraktale के द्वारा
December 22, 2011

शक्ति जी नमस्कार, यह तो सब जानते थे की ये कितना मजबूत बिल लायेंगे, इनका बार बार कहना की मजबूत बिल लायेंगे सिर्फ इसलिए था की जनता के सामने अन्ना और टीम की छवि खराब की जाए.

    shaktisingh के द्वारा
    December 24, 2011

    रक्तले जी, सरकार जितना भी प्रयास कर ले उनकी नियत को जनता समझने लगी है.

sinsera के द्वारा
December 22, 2011

सच है, लेकिन आम जनता को भुलावे में रखना भी तो सरकार का कर्त्तव्य है,एक बात और!! अब आप देख सकते हैं कि मैं ने अपना ब्लॉग सही जगह पर पोस्ट किया है, गलती पर ध्यान दिलाने का धन्यवाद!!

    shaktisingh के द्वारा
    December 22, 2011

    मेरे सुझाव पर आपने गौर किया इसके लिए आपको धन्यवाद

sadhana thakur के द्वारा
December 21, 2011

सच कहा शक्ति भाई ,हंगामा तो बहुत हुआ पर नतीजा ढाक के तीन पात …….बहुत अच्छा लेख ……. http://sadhanathakur.jagranjunction.com/2011/12/21/हर-मुलाकात-का-अंजाम-जुदाई/

    shaktisingh के द्वारा
    December 22, 2011

    साधना जी प्रतिक्रिया देने के लिए आपका धन्यवाद


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