एक नजर इधर भी

एक ब्लॉग अपने देश के नाम

25 Posts

236 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 5235 postid : 115

द्वार-द्वार अपनी इज्जत को ढूंढ़ते सांसद

Posted On: 29 Mar, 2012 पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

cartoonएक बार सांसद अपने खोए हुए मान-सम्मान को वापस पाने के लिए यात्रा पर निकले. उनका यह अभियान उस समय शुरू हुआ जब हर तरफ से उन्हें नीचा दिखाया जा रहा है. अन्ना टीम से लेकर मीडिया संस्थान भी उनके मान सम्मान को धूल में मिटाने में लगे हुए हैं. सांसदों का यह यात्रा 10 जनपथ दिल्ली से निकलेगा. सभी सांसद अपने मान सम्मान और खोए हुए इज्जत को तलाशने के लिए 10 जनपथ पर इकठ्ठे हुए. वहा फुल एसी बस उनके स्वागत में फुलों की माला लेकर खडी थी. सभी सांसद उस बस मे बैठ गए जिससे इस यात्रा का सुभाआरंभ हो गया.


बस अपनी धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ रही थी. उसमे बैठे सांसद अपनी इच्छा से यात्रा का आनंद उठा रहे थे. अपने मान-सम्मान को तलाशते हुए सांसदो की यह बस चुनाव आयोग के घर पहुंची. सांसदों का एक नेता जो इस पूरे यात्रा का नेतृत्व कर रहा था  उसने चुनाव आयोग से पुछा कि क्या आपने हमारी इज्जत को देखा है ऐसा लगता जैसे वह हमसे रूठ कर कही चली गई है. चुनाव आयोग- अरे भाई क्यों हमें तंग कर रहे हो, अगर तुम्हारे साथ किसी और ने हमें देख लिया तो भूचाल आ जाएगा. तुम्हारे अपने घर में शांति नहीं है तो हमारे घर में अशांति क्यों फैलाने आए हो. बड़ी मुश्किल से हमारी इज्जत बची हुई है क्यो उसे नेस्तनाबूत करने पर तुले हुए हो. अपने इज्जत को तुम कही और ढुंढ़ों यहा कोई इज्जत नहीं रहती. सांसद वहां से निराश हो कर चले गए.


ड्राइवर ने गाडी चलाया अगला पड़ाव था सर्वोच्च न्यायालय ड्राइवर ने गाड़ी को तेज करते हुए कुछ ही घंटों में गाड़ी को सर्वोच्च न्यायालय के द्वार पर ला खड़ा किया. सासंदो के नेता ने न्यायालय से सवाल पूछा कि आपने कही हमारे मान सम्मान को देखा है. सर्वोच्च न्यायालय- देखिए जनाब पहले से ही हम आपसे परेशान है. आपके ही करम है जिससे हमें लाखों तरह की याचिकाए लोगों की सुननी पड़ती है. अगर आप अपना काम करते है तो कई मुद्दों के केश हमारे पास पड़े नहीं होते. कृप्या करके आप अपने इज्जत और सम्मान को कहीं और तलाशे यहा नहीं. इस तरह से सांसदों को सर्वोच्च न्यायालय से भी फटकार मिली.


अब सांसदों ने अपनी उम्मीद की आश को लेकर राष्ट्रपति के द्वार पर पहुंचे और अपना सवाल राष्ट्रपति के सामने रखा. राष्ट्रपति ने जवाब दिया कि मै तो नाममात्र की हूं. यहां तो मेरे निर्धारित काम होते है जो आप लोग निर्धारित करते है. उससे अधिक मै कुछ भी नहीं जानती, आपके मान सम्मान के बारे में क्या बता पाउंगी.


कई तरह के संवैधानिक संस्थाओं के घर की यात्रा करने के बाद अंत में सांसदों की यह गाड़ी सविधान के घर पर पहुंची. उनकों उन सब को उम्मीद थी कि उनकी समस्याओं का निवारण यहां जरूर होगा. लेकिन उनके उम्मीद पर तब पानी फिर गया जब सविधान ने उनके सभी कर्मों को एक-एक करके गिनाया जिससे देश की छवी को काफी नुकसान पहुंचा है. सविधान ने उन्हें बताया कि तुम्हारी यह स्थिति तुम्हारे अपने कर्मों की वजह से हुई है. भ्रष्टाचार और अन्य दूसरे बुरे कर्मों से ही तुम्हारी इज्जत और मान सम्मान तुमसे दूर भाग गए हैं. अगर तुम चाहते हो कि तुम्हारी खोई हुई मान सम्मान वापस मिल जाए तो तुम सभी सांसद मन लगाकर दिल से जनता के लिए काम करों. फिर देखना कुछ ही दिनों में मान-सम्मान वापस आ जाएगी. सविधान की बातों को सुनकर सांसदों ने निर्णय लिया कि यह तो हमारे धर्म के खिलाफ है. भ्रष्टाचार और काले धन के बिना हम जी ही नहीं सकते. इसलिए हमें इज्जत और सम्मान नहीं चाहिए हम चोर और अपराधी कहलाना ही अपने आप में गर्व महशूस करेंगे.




Tags:                   

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (3 votes, average: 4.67 out of 5)
Loading ... Loading ...

8 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Kumar Gaurav के द्वारा
April 7, 2012

नमस्ते शक्ति भाईसाहब बहुत सुन्दर व्यंगात्मक रचना. बधाई हो.

    shaktisingh के द्वारा
    April 17, 2012

    कुमार जी , प्रतिक्रिया देने के लिए आपका धन्यवाद

dineshaastik के द्वारा
April 1, 2012

शत प्रतिशत सच….क्या कभी बदलाव नहीं आयेगा….

    shaktisingh के द्वारा
    April 2, 2012

    दिनेश जी, प्रतिक्रिया के धन्यवाद…………. 

संतोष पांडेय के द्वारा
March 31, 2012

बधाई हो। आपका यह लेख आज की राजनीति को बेनकाब करता है।  namaskar.jagranjunction.com

    shaktisingh के द्वारा
    March 31, 2012

    संतोष जी, प्रतिक्रिया देने के लिए धन्यवाद

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
March 31, 2012

वाह भाई वाह ! क्या छक्का मारा है-( पता नहीं गिर कहाँ गया इनके दीदे का पानी, कई रंग में रँगी हुई है इनकी राम- कहानी | ) ये हैं शंख डपोर ( कविता ) में मैंने भी कुछ ऐसा ही कहा है | आप ने तो गज़ब का ठीकरा फोड़ा है उनके सर | एक बार पुनः बधाई !!

    shaktisingh के द्वारा
    March 31, 2012

    विजय जी, प्रतिक्रिया पर आपको धन्यवाद


topic of the week



latest from jagran