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कांग्रेस के लिए बजी खतरे की घंटी

Posted On: 18 Apr, 2012 पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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rahul gandhiजब कोई खिलाड़ी लगातार बुरे प्रदर्शन से गुजरता है तो समझ लेना चाहिए कि उस खिलाड़ी पर चयनकर्ताओं की गांज गिरने वाली है. उसे टीम से बाहर करने की योजना बनाई जा रही है. कुछ ऐसा ही हाल कांगेस पार्टी का ही है. बीते कई महीनों से जिस तरह से कांग्रेस की फजीहत हो रही है उससे तो यही समझा सकता है कि आने वाला भविष्य कांग्रेस के लिए सुनहरा नहीं रहने वाले. एक हार के बाद दुसरा हार दुसरे हार के बाद तीसरा हार यह कांग्रेस की आदत सी बन चुकी है, जिससे पार पाना उनके के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रही है.


भ्रष्टाचार, अजीब-अजीब तरह के घोटाले, महंगाई और कुशासन ने कांग्रेस के खिलाफ एक नाकारात्मक लहर सी छेड दी है. इससे कांग्रेस की शाख को काफी नुकसान पहुंचाया है. उन्हें चुनाव के हर स्तर पर हार का मुंह देखना पड़ रहा है. फिलहाल हुए पांच राज्यों के विधानसभा में कांग्रेस ने अपना पुरा दमखम दिखाया. युवराज राहुल का भविष्य दांव पर लग गया लेकिन परिणाम क्या निकला ढाक के तीन पात, कांग्रेस को इन चुनाव में बुरी हार का सामना करना पड़ा. अब हुए दिल्ली नगर निगम चुनाव के परिणाम को देखकर यही कहा जा सकता है कांग्रेस का भविष्य खतरे में है.


हम कैसे भुला सकते हैं कि पिछला साल (2011) कांग्रेस के लिए सबसे पीड़ादायक साल था. जिसके दर्ज अभी भी ताजे हैं. अब तक जितने भी कांग्रेस के लिए बद्दुवाएं निकलते होंगे उनमें सबसे ज्यादा बद्दुवाएं 2011 में निकले. अन्ना और रामदेव द्वारा चलाए गए भ्रष्टाचार विरोधी अभियान ने उनकी कमाई हुई इज्जत को मिट्टी में मिला दिया. देशभर में कांग्रेस पार्टी को जन विरोधी पार्टी का दर्जा दिया गया. लेकिन विडंबना तो देखिए कि भ्रष्ट पार्टी का दर्जा प्राप्त करने वाली कांग्रेस अपनी पिछले भूलों से सीख नहीं ले रही है. आज स्थिति यह है पार्टी अपने बुरे प्रदर्शन को बार-बार दोहरा रही है.


इस समय जरुरत है कांगेस को पार्टी और सरकार स्तर पर महत्वपूर्ण निर्णय लेने की. जन हित संबंधित लंबित पड़े विधेयक को जल्द से जल्द से पास करना पड़ेगा, भ्रष्टाचार और महंगाई पर लगाम लगाने के लिए दृढ इच्छाश्क्ति पैदा करनी पड़ेगी. उसे अपने अंदर जन कल्याण की भावना फिर से जगना होगा. क्योकि 2014 दूर नहीं हैं कांग्रेस को खतरे की घंटी की आवाज सुननी पड़ेगी और उस पर जल्द से जल्द अमल में लाना पड़ेगा.




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10 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

bharodiya के द्वारा
April 21, 2012

ये कोन्ग्रेसी फोडा अपनी भूल न सुधारे ईस में ही भलाई है, वरना वो कच्चा रह जायेगा । २०१४ तक दर्द तो करेगा लेकिन पूरा पक जयेगा । अपने आप ही फूट जायेगा ।

    shaktisingh के द्वारा
    April 27, 2012

    जनाब प्रतिक्रिया देने के लिए धन्यवाद

चन्दन राय के द्वारा
April 20, 2012

शक्ति सिंह जी, मित्रवर हम लोगो की इक बड़ी समस्या है की हम बड़े से बड़ा घाव कुछ पल में ही भुला देते है , इसलिए मेरे मन में शंकाए है की कंही कांग्रेस सत्ता में दुबारा न आ जाये

    shaktisingh के द्वारा
    April 20, 2012

    चंदन जी आपने बिलकुल सही कहा भूलने में तो हम कई सारे रिकोर्ड तोड़ते हैं, आने वाले दिनों में कांगेस जनहित से संबंधित कुछ आवश्यक निर्णय ले लेगी या फिर बजट में कुछ छूट दे देगी इसको देख जनता उनके पिछले कर्मों को भुला देगी.

yogi sarswat के द्वारा
April 20, 2012

श्री शक्ति सिंह जी , नमस्कार ! कांग्रेस के लिए 2014 की बड़ी दूर की कौड़ी है ! क्यूंकि ऐसा कोई निशान नज़र नहीं आता जिससे ये लगे कि कांग्रेस का प्रदर्शन भविष्य में सुधर पायेगा ! बढ़िया लेख !

    shaktisingh के द्वारा
    April 20, 2012

    योगी जी, हमें नही भूलना चाहिए कि अभी 2014 के चुनाव में लगभग 2 साल बाकी हैं और सरकार कांग्रेस की है. इसमे कांग्रेस चाहे तो बहुत कुछ कर सकती है.

कुमार गौरव के द्वारा
April 19, 2012

शक्ति भाई सही कहा आपने. कांग्रेस के अब गिने चुने दिन ही बाकि हैं सत्ता में.

    shaktisingh के द्वारा
    April 20, 2012

    आपका अनुमान सही हो लेकिन कुछ कहा नहीं जा सकता

akraktale के द्वारा
April 19, 2012

शक्ति जी सादर नमस्कार, कई गलतियां करने वाली जन विरोधी कांग्रेस आईने में अपनी छवि देखना ही नहीं चाहती तो सुधार किस तरह होगा. इसमें कांग्रेस के बडबोले पदाधिकारी मुख्यरूप से जिम्मेदार हैं क्योंकि अपनी छुट्टी होने के डर से वे कांग्रेस अध्यक्षा के सामने आइना आने ही नहीं दे रहे हैं और शायद वह खुद भी आईने के सामने जाने से डरतीं हो क्योंकि दाग तो कांग्रेस के हर चेहरे पर है.

    shaktisingh के द्वारा
    April 20, 2012

    रक्तले जी आपको नमस्कार, आपकी बात सही कांग्रेस में कुछ ऐसे लोग है जो अपने विचारो से कांग्रेस पार्टी को प्रभावित करने का मादा रखते है. और यही लोग कांग्रेस की नइया डुबो रहे हैं.


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