एक नजर इधर भी

एक ब्लॉग अपने देश के नाम

25 Posts

236 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 5235 postid : 125

भ्रष्टाचारियों के भंवर में सचिन

  • SocialTwist Tell-a-Friend

सचिन को राज्यसभा में मनोनीत किए जाने के मसले पर कई ऐसे बाते हैं जिन पर चर्चा होनी चाहिए, जैसे: क्या सरकार सचिन के नाम का इस्तेमाल अपने पक्ष में करने जा रही है. दूसरा अन्य वरिष्ठ खिलाडियों के रहते हुए खेल में सक्रिय सचिन को मनोनीत को किया जाना एक खतरनाक परंपरा तो नहीं. तीसरा जो कही ज्यादा महत्वपूर्ण वह यह है कि क्या सचिन द्वारा राजनैतिक छल-प्रपंच का शिकार होकर क्रिकेट का परित्याग कर देना उचित है ?

sachinभारत में खेल और राजनीति का चोली-दामन का रिश्ता है. यह इस तरह का गठजोड है जो एक दूसरे को प्रभावित करती हुई दिखती है. आप किसी भी खेल संस्थान पर नजर डाल लीजिए उसका प्रमुख कही न कही राजनीति से जुड़ा हुआ जरूर है. लेकिन लगता है कि क्रिकेट का रिश्ता राजनीति से कुछ ज्यादा ही है. अगर हम भारत के क्रिकेट इतिहास पर नजर डालें तो हम देखेगे कि कई क्रिकेटर राजनीति में हाथ अजमा चुके हैं और कानून बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहे हैं. इनमें एक और नाम जुड़ चुका है महान बल्लेबाज सचिन तेन्दुलकर का .


सचिन तेन्दुलकर किसी पहचान के मोहताज नहीं है. उन्होंने अपने व्यवहारिक और चतुराईभरी बल्लेबाजी से विश्वभर में एक पहचान बनाई है. क्रिकेट के रिकॉर्ड का यह बादशाह जब मैदान पर मौजूद होता है तो विरोधियों के लिए चिंता और भारतीयों के लिए खुशी का सबब बन जाता है. वह एकलौते ऐसे बल्लेबाज हैं जो लगातार दो दशक से क्रिकेट की दुनिया में छाए हुए हैं. भारतीय लोग कभी उन्हें क्रिकेट का पर्याय तो कभी क्रिकेट का भगवान के रूप में संबोधित करते हैं.


आज जनता का यही भगवान राजनीति पारी खेलने जा रहा है. राजनीति पार्टी उन्हें महत्व को समझते हुए देश की उपरी सदन में जाने का मौका दिया है. सचिन के कर्तव्यनिष्ठ तथा साफ झवि होने के नाते उनका संसद में जाना कोई हैरान करने वाली बात नही है. आज संसद को सचिन जैसे साफ छवि के लोगों की जरूरत है. लेकिन यहा सवाल उठता है कि क्या सचिन ज्यादा दिन तक अपने आप साफ छवी वाला नेता साबित कर पाएंगे. यह कहना मुश्किल है.


आज सांसद अपने करतूतों की वजह से पूरे देशभर में बदनाम हैं. संसद मे कैसे और किस तरह से कानून बनते है, किस कानून को ज्यादा महत्व दिया जाता है और किस कानून को नहीं यह जग जाहिर है. पिछले कई सालों से संसद अपने मर्यादित रूप में नहीं दिख रहा. हो-हल्ला, उपद्रव, हंगामा संसद के लिए आम शब्द हो गए जो सत्र के दौरान मीडिया में प्रयोग किए जाते हैं. इसके अलावा पूरे देश में भ्रष्ट सांसदों के खिलाफ एक लहर सी है जो समय बीतने के साथ काफी तेज हो चुकी है. इन्हीं सांसदों के साथ संसद में बैठकर सचिन संसद की कार्यवाही में भाग लेंगे. जनहित कानूनों को पास करना या नहीं करना जैसे मुद्दे पर पर राजनीति करते हुए दिखेंगे.


कांग्रेस के आलाकमान सचिन नाम के शब्द को भलीभांति समझते हैं. वह समझते है कि सचिन का वक्त खेल से संन्यास लेने का चुका है. इसलिए वह साचिन के नाम को भुनाना चाहते हैं. वह जानते हैं कि इस समय पूरे देश में उनकी पार्टी के खिलाफ एक जन विरोधी लहर है, भ्रष्टाचारी पार्टी होने का टैग लग चुका है जो मिटाए नहीं मिट रहा तो ऐसे में सचिन उनके लिए वरदान साबित हो सकते हैं. पिछले कई चुनावी परिणाम कांग्रेस लिए नाकारात्मक साबित हुए है और 2014 भी नजदीक आ चुका है ऐसे में अगर हम भविष्य में सचिन तेंदुलकर को कांग्रेस की तरफ से प्रचार करते हुए देखे तो हमें आश्चर्य नहीं होना चाहिए.




Tags:                             

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 1.50 out of 5)
Loading ... Loading ...

12 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

akraktale के द्वारा
April 29, 2012

शक्ति जी नमस्कार, आपकी सोच भी उन करोड़ों लोगों से मिलती है जो आज सचिन के राज्यसभा में जाने के पक्ष में नहीं हैं.यह बात नहीं कि सचिन को सम्मान मिलने से किसी को कोई तकलीफ है.मगर मेरा मानना है कि सचिन को क्रिकेट से संन्यास के बाद ही राजनीति में प्रवेश करना चाहिए था. और कभी लगता है कि कहीं यह उनके क्रिकेट जीवन को अनचाहे मोड़ पर ही ख़त्म कर देने कि साजिश तो नहीं?

    shaktisingh के द्वारा
    May 2, 2012

    रक्तले जी, अगर सचिन सच में जन सेवा करना चाहते है बाहर से भी कर सकते जरूरी नहीं है कि जो संसद में जाता है वही जन सेवा करता है.

dineshaastik के द्वारा
April 29, 2012

निश्चित रूप से राजनीति में आने से सचिन का सम्मान कम होगा। अभिताभ  बच्चन से सीखना चाहिये था सचिन को।

    shaktisingh के द्वारा
    May 2, 2012

    बिलकुल अभिताभ बच्चन से सचिन को सिखना चाहिए

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
April 27, 2012

सचिन गलत बैनर से गए हैं. बधाई.

    shaktisingh के द्वारा
    May 2, 2012

    प्रदीप जी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद

satyavrat shukla के द्वारा
April 27, 2012

बिल्कुल ही सही …….

    shaktisingh के द्वारा
    May 2, 2012

    शुक्ला जी, प्रतिक्रिया देन के लिए आपको धन्यवाद

कुमार गौरव के द्वारा
April 27, 2012

शक्ति जी सादर! मेरा भी ये मानना है की सचिन को राजनीति में नहीं आना चाहिए…राजनीति के दांव-पेंच सचिन कभी नहीं समझ पाएंगे…हाँ सचिन “मेरे नेता जी (मेरी नयी रचना के हीरो)” से मिलते तो सही रहता…

    shaktisingh के द्वारा
    May 2, 2012

    गौरव जी, सही कहा आपने, राजनीति में तमाम तरह की गंदगी कोने-कोने फैल चुकी है जिसको साफ करने के लिए अभियान छेडना होगा. अगर सचिन अकेले ही इस गंदगी में कूदेगे तो वह भी अपना चरित्र गंदा कर लेंगे.

चन्दन राय के द्वारा
April 27, 2012

शक्ति भाई , चलो इस बहाने इक सच्चा इंसान देश सेवा का काम आयेगा , कहने को कांग्रेस उनका उपयोग कर रही है , पर कुछ आम लोगो का तो फायदा होगा ,

    shaktisingh के द्वारा
    May 2, 2012

    चंदन जी, प्रतिक्रिया देने के लिए आपको धन्यवाद, अगर आपकी बात पर गौर करें तो कई सारे सड़े हुए सेव में अगर एक सेव सही सलामत रखा गया तो उसका भी सड़ना स्वभाविक है. सचिन का भी यही हाल है.


topic of the week



latest from jagran