एक नजर इधर भी

एक ब्लॉग अपने देश के नाम

25 Posts

236 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 5235 postid : 136

कांग्रेस में एक ‘एडॉप्टेड चाइल्ड’ की तरह हैं मनमोहन सिंह

  • SocialTwist Tell-a-Friend

अमरीका की प्रसिद्ध पत्रिका टाइम ने भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अपने ताज़ा अंक के कवर पृष्ठ पर स्थान देते हुए उन्हें एक कमज़ोर और लाचार नेता बताया है. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के लिए यह खबर कोई नई नहीं है. आए दिन कोई न कोई अखबार और मैगजीन उनकी कमजोरियों और नाकामियों के बारे में चर्चा करता रहता है. गौर करने वाली बात यह कि इस मुद्दे को इस बार प्रधानमंत्री के चहेते देश अमरीका के एक मैगजीन ने उठाया है. यह वही देश है जो प्रधानमंत्री को एक सफल अर्थशास्त्री और कुशल राजनीतिज्ञ मानता है.


अगर अर्थशास्त्री की बात की जाए तो यूपीए के सभी नेता मानते हैं कि मनमोहन सिंह जैसे कुशल अर्थशास्त्री पूरे देश में नहीं हैं. उनके इस बात पर गौर की जाए यह बात कुछ हद तक सही है लेकिन उस अर्थशास्त्री का क्या फायदा जिसका इस्तेमाल देश के लिए न हो पाए. अगर मनमोहन सिंह अपनी इच्छा से कुछ करना भी चाहते होंगे तो उनके इर्द-गिर्द बैठे दस जनपथ के चमचे उन्हें करने नहीं देते होगे. एक अर्थशास्त्री होने के नाते मनमोहन सिंह अगर देश की अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए कोई निर्णय लेना चाहते होंगे तो उन्हें यह चमचे अपने स्वार्थ और लाभ के लिए लेने नहीं देते होंगे. मेरे ख्याल से कुछ वजह हो सकती है जिससे मनमोहन सिंह सफल नेतृत्व करने वाले वाले प्रधानमंत्री नहीं बन पा रहे हो.


आपको याद होगा कि उदार से दिखने वाले मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री का पद कैसे मिला. 2004 में जब सोनिया गांधी ने कुछ वजहों से प्रधानमंत्री का पद ठुकरा दिया और तमाम कांग्रसी नेताओं के गुहार के बाद प्रधानमंत्री का पद नहीं अपनाया तो उस समय एक ऐसे व्यक्ति का नाम लिया गया जिसको लेकर सब आश्चर्यचकित थे. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ही थे जिनका नाम सोनिया ने आगे किया था. तो मनमोहन सिंह के लिए प्रधानमंत्री पद, चुनाव में जीत का पुरस्कार नहीं बल्कि किसी और की अमानत है जिस पर वह 8 साल तक नाममात्र शासक के रूप शासन करते आ रहे हैं.


कांग्रेस के छोटे बड़े सभी नेता यह जानते हैं कि मनमोहन सिंह को कांग्रेस में एक ‘एडॉप्टेड चाइल्ड’ की तरफ स्वीकारा गया है. मनमोहन का कद पार्टी में कुछ खास नहीं है इसलिए मंत्री से लेकर कोई बड़े नेता उनकी बातों पर ज्यादा तवज्जो नहीं देते. यही कांग्रेस और दूसरे दलों के नेता प्रधानमंत्री को अनदेखा कर अपने विभागों में जमकर भ्रष्टाचार करते हैं.


कांग्रेस में मनमोहन सिंह की स्थिति एक मजबूर और हताश नेता के रूप हो चुकी है. अगर वह प्रधानमंत्री के पद को छोड़ते हैं तो उन्हें भगौड़ा घोषित कर दिया जाएगा वहीं अगर पद पर बने रहते हैं तो उनपर कई तरह के आरोप आगे भी लगते रहेंगे.




Tags:            

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

12 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
July 21, 2012

हर जगह कोई न कोई किसी की गोद में बैठा है

yogi sarswat के द्वारा
July 13, 2012

कांग्रेस में मनमोहन सिंह की स्थिति एक मजबूर और हताश नेता के रूप हो चुकी है. अगर वह प्रधानमंत्री के पद को छोड़ते हैं तो उन्हें भगौड़ा घोषित कर दिया जाएगा वहीं अगर पद पर बने रहते हैं तो उनपर कई तरह के आरोप आगे भी लगते रहेंग बिलकुल सही लिखा आपने शक्ति सिंह जी ! मनमोहन को असफल कराकर कांग्रेस राहुल के लिए ज़मीन तैयार करना चाहती है ! सटीक लेख

    shaktisingh के द्वारा
    July 18, 2012

    योगी जी आपको धन्यवाद जो आपने मेरा लेख पढ़ा

Ajay Kumar Dubey के द्वारा
July 12, 2012

आपके विचारों से सहमत. इन्होने जीवन भर गुलामी की और आज भी कर रहे हैं.

    shaktisingh के द्वारा
    July 18, 2012

    अजय जी. प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद

shaktisingh के द्वारा
July 11, 2012

मेरा मानना है कि अगर वह कमजोर थे और जानते थे कि मेरी कमजोरी का फायदा मेरे अपने ही लोग उठाएगे तो उन्होंने प्रधानमंत्री का पद क्यो स्वीकारा.

dineshaastik के द्वारा
July 11, 2012

सच्चाई को बयां करती सुन्दर प्रस्तुति…सराहनीय आलेख…बधाई….

    shaktisingh के द्वारा
    July 11, 2012

    प्रतिक्रिया देने के लिए आपको धन्यवाद

akraktale के द्वारा
July 10, 2012

शक्ति जी नमस्कार, ऐसे प्रधान मंत्री को देखकर तो मुझे किसी फिल्म में प्रयोग डायलाग याद आता है “ये जीना भी कोई जीना है लल्लू” मगर क्या करें, अपना सम्मान बेच चुके गुलाम हैं ये.

    shaktisingh के द्वारा
    July 11, 2012

    रक्तले जी, आपने सही जगह इस डायलोग का प्रयोग किया है

bharodiya के द्वारा
July 10, 2012

भाई शक्तिसिंह एम.एम तो पहले से ही नौकरशाह है । उन से ज्यादा उम्मिद नही करनी चाहिए । उम्हों ने जो अच्छा किया जिम्मेदार नरहिंह राव थे । आज बूरा करते हैं जिम्मेदार सोनिया है । नौकर शाह मजबूर होता है ।

    shaktisingh के द्वारा
    July 11, 2012

    मेरा मानना है कि मनमोहन सिंह ने प्रधानमंत्री के पद को अपनाकर सबसे बड़ी गलती की.


topic of the week



latest from jagran